अल्सर गायब हो गया
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श्री आर. पी. त्रिपाठी, उज्जैन
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1974 में अचानक मुझे पेट में भयंकर तकलीफ हुई। चैक कराने पर पता चला कि पेप्टिक अल्सर है और वह अल्सर इस स्थिति तक पहुँच चुका था कि कभी भी फूट सकता था। डॉक्टर ने कहा कि जितनी जल्दी हो सके आप्रेशन करा लो, यदि यह फूट गया तो आपकी जान भी जा सकती है। मुझे तकलीफ इतनी ज्यादा थी कि मैं दो घूँट पानी भी नहीं पी सकता था। कुछ ही दिनों में मेरा वजन 20 किलो कम हो गया था। कानपुर के एक अनुभवी डॉक्टर से ऑपरेशन का समय भी ले लिया था। गायत्री परिवार के समर्पित कार्यकर्ता श्री मोतीलाल जी मेरे अच्छे मित्र थे। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन तो कराना ही है, पर क्योंकि हम गुरुजी से जुड़े हैं, तो ऑपरेशन के पहले गुरुदेव के दर्शन कर लें तो अच्छा रहेगा।’’ हम गुरुदेव के दर्शन करने शान्तिकुञ्ज पहुँचे। गुरुदेव ने देखते ही पूछा, ‘‘सब ठीक-ठाक है?’’ मैंने कुछ नहीं बताया, पर मेरी पत्नी ने सब हाल बताया और कहा, ‘‘गुरुदेव, ऑप्रेशन कराना है, आपका आशीर्वाद चाहिये।’’
सुनकर गुरुदेव ने कहा, ‘‘बेटा, मैं भी तो डॉक्टर हूँ। अब तुम यहाँ आ गये हो तो ऑपरेशन की कोई जरूरत नहीं है। मैं तुम्हारा पूरा इलाज करता हूँ। यहाँ से रोज हरकी पौड़ी पर स्नान करने जाना और रोज खूब पानी पीना। रोज शाम को मेरे प्रवचन में भाग लेना और कल मनसा देवी के दर्शन करना।’’
उस समय मेरी स्थिति ऐसी थी कि मैं 10 कदम भी नहीं चल पाता था। दो घूँट पानी मुश्किल से पी पाता था। 1974 के समय में मनसा देवी के लिये पहाड़ पर चढ़ कर जाना स्वस्थ आदमी को भी कठिन जान पड़ता था। उस पर भी आश्चर्य की बात, गुरुजी बोले, ‘‘हर की पौड़ी पर दही-बड़े और गोलगप्पे खाना।’’ यह तो मेरे मन की बात थी, क्योंकि दोनों ही मुझे बहुत अच्छे लगते थे।
मैंने गुरुजी के कहे अनुसार किया। हर की पौड़ी नहाने के लिये गया। मन में सोचा, जब गुरुदेव ने दही-बड़े खाने के लिये कहा है तो खा ही लेता हूँ। मैंने छक कर दही-बड़े खाये। मुझे कुछ नहीं हुआ। दूसरे दिन हम मनसा देवी की चढ़ाई भी चढ़ गये। जैसा-जैसा गुरुजी ने कहा था, वैसा ही किया। 15 दिन का समय गुरुदेव ने दिया था। कहा था, कहीं अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है, सब कैंसिल कर दो, बाद में जाना। 15 दिन बाद जब गुरुदेव के पास गये तो उन्होंने कहा, ‘‘बेटा, अब तुम जाओ। डाक्टर के पास जाने की कोई जरूरत नहीं है। कभी पेट में दर्द हो तो चले जाना।’’ उस समय से आज तक मुझे पेप्टिक अल्सर नहीं है।
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