Sunday, December 19, 2021

अपनी बातचीत में प्रभाव उत्पन्न करना एक उपलब्धि है।

 अपनी बातचीत में प्रभाव उत्पन्न करना एक उपलब्धि है।

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       कितने ही व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिनकी न कोई बात मानता है, न उनका कोई सच्चा मित्र, हितैषी, शुभचिन्तक ही होता है। वे जिससे भी बात करते हैं, वही उनका शत्रु बन जाता है। इसका कारण होता है- व्यक्ति का वार्तालाप करने का ढँग। जिससे भी बातें करते हैं, ऐसी भूल कर जाते हैं, कि सामने वाले के अन्तःकरण पर चोट कर जाती है और वह उसके प्रति गलत धारणा बना लेता है। अन्यथा वाक्-चातुर्य और व्यवहार कुशलता के बल पर तो पूरा व्यवसाय क्षेत्र ही चल रहा है।

      जीभ की कमाई खाने वाले वक्ता, गायक, प्रचारक अपनी चतुराई के आधार पर ही लोगों को प्रभावित करते और अपनी बात मनवा लेते हैं। व्यवसायी लोग अपने व्यवसाय और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए नए-नए क्षेत्र व साधन व व्यक्ति खोजने में इसी आधार पर सफल होते रहते हैं।

       बातचीत करना वस्तुतः एक कला है, अन्यथा बातें तो गूँगे-बहरों को छोड़कर सभी करते और सुनते हैं, लेकिन कौन किसका, किस प्रकार प्रभाव ग्रहण करता है? इसका आंकलन किया जाय, तो यही ज्ञात होगा कि कई लोगों की बातें उबा देने वाली, या मन खट्टा कर देने वाली अथवा हृदय को चोट पहुँचाने वाली होती है।

       कई व्यक्तियों की बातें सुनकर ऐसा लगता है कि उनकी बात का न सिर है न पैर। न तो वह अपने शब्दों का प्रयोग समझ-बूझकर करते हैं, जिससे श्रोता प्रभावित हो सकें, न ही वह यह जानकर बातें करते हैं, कि किस अवसर पर कैसी बात करनी चाहिए? क्योंकि उन्हें इस संबंध में कोई ज्ञान नहीं। फलत: उनकी बातें बोरियत लाने वाली और अप्रासंगिक ही हो जाती है।

       विश्व विख्यात विचारक स्वेट मार्डेन के अनुसार व्यवहारिक जीवन की सफलता के लिए वाक्-चातुर्य के साथ व्यवहार कुशलता, शिष्टता, सज्जनता, मधुरता आदि सद्गुण यदि व्यक्ति के जीवन में समाहित हो जाय, तब जीवन संग्राम में सफलता मिलना सुनिश्चित है।

       श्रेष्ठ वाक्पटु होना, लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करना तथा उनसे सहयोग प्राप्त करना, अपनी बातचीत में प्रभाव उत्पन्न करना एक उपलब्धि है। मित्र बनाने में ही नहीं कार्यक्षेत्र में सफल होने व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त करने के लिए व्यक्ति का व्यवहार कुशल होना नितान्त आवश्यक है।

       यदि व्यक्ति अपने बात साफ ढँग से, नपे-तुले शब्दों में बिना किसी वाक्छल के सधी- बँधी वाणी में व्यक्त करके सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित करता है, तब यह उसकी सफलता है।

( संकलित व सम्पादित) 

युग निर्माण योजना दिसम्बर 1987 पृष्ठ 28

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