Thursday, December 23, 2021

भविष्यवाणियाँ जो पूरी होकर रहेंगी:

 भविष्यवाणियाँ जो पूरी होकर रहेंगी:


धर्म अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होगा। उसके प्रतिपादन का ठेका किसी वेश या वंश विशेष पर न रह जाएगा। सम्प्रदायवादियों के डेरे उखड़ जाएँगे, उन्हें मुफ्त के गुलछर्रे उड़ाने की सुविधा छिनती दीखेगी तो कोई उपयोगी धंधा अपनाकर भलेमानसों की तरह आजीविका उपार्जित करेंगे। ……………… पाखंड पूजा के बल पर जीने वाले उलूक, दिवा प्रकाश से भौचक्के होकर देखेंगे और किसी कोटर में बैठे दिन गुजारेंगे।


अगले दिनों ज्ञानतंत्र ही धर्मतंत्र होगा। ....... तब लोग प्रतिमापूजक देवमन्दिर बनाने की तुलना में पुस्तकालय, विद्यालय जैसे ज्ञानमंदिर बनाने को महत्व देंगे। ………… कथा पुराणों की कहानियाँ तब उतनी आवश्यक न मानी जाएँगी जितनी जीवन समस्यायों को सुलझाने वाली प्रेरणाप्रद अभिव्यंजनाएँ। ….... धर्म के ऊपर चढ़ी हुई सड़ी गली केंचुली उतर कर कूड़े-करकट  ढेर में जा गिरेगी। ………… अपने वर्ग के  नहीं, समस्त विश्व के हित साधन की दृष्टि से ही समस्यायों पर विचार किया जाएगा।


जाति या लिंग के कारण किसी को ऊँचा या किसी को नीचा न ठहरा सकेंगे। छूत-अछूत का प्रश्न न रहेगा। गोरी चमड़ी वाले काले लोगों से श्रेष्ठ होने का दावा न करेंगे और ब्राह्मण हरिजन से ऊँचा न कहलायेगा। ………………… हरामखोरी करते रहने पर भी गुलछर्रे उड़ाने की सुविधा किसी को न मिलेगी। ................... तब न तो मांसाहार की छूट रहेगी और न पशु पक्षियों के साथ निर्दयता बरतने की। ममता और आत्मीयता के बंधनों में बँधे हुए सब लोग एक दूसरे को प्यार और सहयोग प्रदान करेंगे। 


-युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

अखंड ज्योति मई 1972, पृष्ठ-35-36

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