Sunday, August 29, 2021

प्राणशक्ति एक-जीवंत ऊर्जा

 ऋषि चिंतन

*********

प्राणशक्ति एक-जीवंत ऊर्जा

**********************

👉 पनडुब्बे गहरे समुद्र में डुबकी लगाकर मोती बीनते हैं । बहुमूल्य खनिज प्राप्त करने के लिए धरती को गहराई तक खोदते जाने और उस विभीषिका के मुख में प्रवेश करने का साहस जुटाना पड़ता है । *अपनी प्रसुप्त शक्तियों को जाग्रत करने के लिए अन्तश्चेतना की गहरी परतों में उतरने के लिए "अद्भुत धैर्य" और "अविचल प्रयत्न" करने होते हैं ।* यह सब अनायास ही नहीं हो जाता, वरन् अग्निपरीक्षा में गुजरने पर ही सफलता का श्रेय प्राप्त होता है । 


👉 *सोते सर्प और सोते सिंह को जगाने में जितना पराक्रम चाहिए, उतना ही अन्तश्चेतना के सूक्ष्म संस्थानों को जगाते समय भी चाहिए ।* वन्य पशुओं को पालतू और प्रशिक्षित करना धैर्यवान लोगों का काम है । मरुथल को उर्वर बनाने के लिए दूरदर्शिता, अथक श्रमशीलता और साधन सामग्री जुटानी पड़ती है । अनगढ़ व्यक्ति को सुगढ़ और सुसंस्कृत बनाने के लिए कलाकारों जैसा कौशल विकसित करना पड़ता है । *शत्रु को मित्र बना लेने की प्रशंसा होती है ।* 


👉 अनर्थ में संलग्न विकृत कुसंस्कारों को आमूलचूल परिवर्तित कर श्रेय साधक बना देना विष से अमृत निकालने के समतुल्य है । *ऐसे मार्ग पर चलने के लिए अजस्र प्राण-शक्ति चाहिए ।* 


👉 *अध्यात्म साधनाओं में "प्राणमय कोश" को जाग्रत करके प्रचंड आत्मबल संचय करने की आवश्यकता इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बताई गई है ।*

No comments:

Post a Comment