हारिए न हिम्मत - धैर्य रखें!
( भाग 6)
***********************
उठो! जागो!! रुको मत!!! जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।
कोई दूसरा तुम्हारे प्रति बुराई करे या निन्दा करे, उद्वेगजनक बात कहे तो उसको सहज करने और उसे उत्तर न देने से बैर आगे नहीं बढ़ता।
अपने ही मन में कह लेना चाहिए कि इसका सबसे अच्छा उत्तर है मौन। जो अपने कर्तव्य कार्य में जुटा रहता है और दूसरों के अवगुणों की खोज में नहीं रहता, उसे आन्तरिक प्रसन्नता रहती है।
जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। हँसते रहो, मुस्कुराते रहो! ऐसा मुख किस काम का जो हँसे नहीं, मुस्कुराए नहीं।
जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते हैं, उनको दूसरों की आलोचनाओं से चिढ़ना नहीं चाहिए।
( संकलित व सम्पादित)
हारिए न हिम्मत पृष्ठ 6
No comments:
Post a Comment