Saturday, August 21, 2021

धर्म के बिना हमारा काम नहीं चलेगा

 ऋषि चिंतन

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धर्म के बिना हमारा काम नहीं चलेगा

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👉 *"धर्म" ही मनुष्य का आधार है, "धर्म" ही जीवन है और "धर्म" ही मरने पर साथ जाता है ।* मनु महाराज कहते हैं -- *"पिता", "माता", "पुत्र", "स्त्री"* और *"जाति वाले"* ये परलोक में सहायता नहीं करते, केवल एक *"धर्म"* ही सहायक होता है । प्राणी अकेला उत्पन्न होता है, अकेला ही मरता है और अकेला ही पुण्य-पाप का भोग करता है, भाई-बंधु तो मरे शरीर को काठ और मिट्टी के ढेले की तरह पृथ्वी पर छोड़कर वापस लौट आते हैं, *केवल "धर्म" ही प्राणी के पीछे-पीछे जाता है ।*


👉 जिस दिन संसार से *"धर्म"* सर्वथा मिटा दिया जाएगा, जिस दिन लोग आत्मा-परमात्मा, लोक-परलोक को मानना सर्वथा छोड़ देंगे, *जिस दिन कर्मफल के सिद्धांत में लोगों की आस्था न रहेगी,* जिस दिन परमात्मा की भक्ति द्वारा परमात्मा के गुणों को अपने भीतर धारण करने वाले धर्मात्मा लोग सर्वथा उत्पन्न होने बंद हो जाएँगे, *उस दिन संसार से सच्चरित्रता उठ जाएगी ।*


👉 नास्तिक लोगों में भी जो कुछ सच्चरित्रता दिखाई पड़ती है, *उसका मूल स्रोत भी "धर्म" ही है ।* *"धर्म"* द्वारा सिखाए गए परम्परा से चले आ रहे सच्चरित्रता के तत्वों को नास्तिक लोगों ने स्वीकार किया है । इसी आधार पर उनका समुदाय, सम्प्रदाय जीवित रह सकने में समर्थ हो रहा है । *वस्तुतः "धर्म" तत्व इतना सार्वभौम, सर्वकालीन और शाश्वत है कि उसे छोड़ देने से नास्तिक-आस्तिक किसी का भी काम नहीं चल सकता ।

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