वर्तमान निम्न स्थिति को बदल देने की सामर्थ्य प्रत्येक मनुष्य में विद्यमान हैं।
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किसके भाग्य में समृद्धि, प्रगति और प्रतिष्ठा बदी है, इसे जानने के लिए किसी के ग्रह-नक्षत्र देखने की आवश्यकता नहीं है और न किसी पंडित, ज्योतिषी से पूछने की आवश्यकता है।
किसी का भी भला-बुरा भविष्य जानने के लिए इतनी जानकारी पर्याप्त है कि कौन अपने को अधिक सुयोग्य, सक्षम एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए किस सीमा तक प्रयत्न कर रहा है?
आज का प्रयास ही कल परिणति बन कर सामने आता है। दूसरा कोई किसी को न ऊँचा उठाता है और न नीचे गिराता है। मनुष्य अपनी विचारणा और क्रिया पद्धति के सहारे ही अपने को उत्कृष्ट और निकृष्ट बनाता है।
तदनुरूप ही उसके सामने परिस्थितियाँ विनिर्मित होती है और सामने आ खड़ी होती है। दूसरों के दिए हुए अनुदान सुरक्षित रखने तथा उनका सदुपयोग कर सकने की क्षमता अपने भीतर से उत्पन्न होती है।
जिन्होंने अपने को शालीनता के ढाँचे में ढाला है, वे समर्थों और सज्जनों से सम्मान तथा सहयोग प्राप्त करते हैं और अपने क्रियाकलाप के आधार पर ऊँचे उड़ते रहते हैं।
विश्वास कीजिए! वर्तमान निम्न स्थिति को बदल देने की सामर्थ्य प्रत्येक मनुष्य में पर्याप्त मात्रा में विद्यमान है। आप जो सोचते हैं, विचारते हैं, जिन बातों को प्राप्त करने की योजनाएँ बनाते हैं, वे आन्तरिक शक्तियों के विकास से अवश्य प्राप्त कर सकते हैं।
(संकलित व सम्पादित)
विचार सार एवं सूक्तियाँ
प्रथम खण्ड 25:13
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