Tuesday, August 31, 2021

शक्ति के भंडार से स्वयं को जोडे!

 शक्ति के भंडार से स्वयं को जोडे!

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गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ—


ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।


देवियो, सज्जनो!


मनुष्य की सामान्य शक्ति सीमित है। प्रत्येक प्राणी को भगवान ने इतना ही सामान दिया है कि वह अपने जीवन का गुजारा कर ले। कीड़ों-मकोड़ों और पशु-पक्षियों को सिर्फ इतना ही ज्ञान, साधना, शक्ति और इंद्रियाँ मिली हैं, ताकि वे अपना पेट भर लें और प्रकृति की इच्छा पूरी करने के लिए अपनी औलाद पैदा करते रहें। इससे ज्यादा कुछ उनके पास है नहीं, लेकिन आपके पास है। अगर आपको इससे कुछ ज्यादा जानना और प्राप्त करना है, तो आपको वहाँ जाना पड़ेगा, जहाँ शक्तियों के भांडागार भरे पड़े हैं। एक जगह ऐसी भी है जहाँ बहुत शक्ति भरी पड़ी है, जहाँ संपत्तियों का कोई ठिकाना नहीं। जहाँ समृद्धि की अनंत शक्ति है। सारे विश्व का मालिक कौन है? भगवान। यह उसी का तो सामान है जिससे उन्होंने दुनिया को बना दिया। यहाँ जो कुछ भी वैभव आप देखते हैं, वह भगवान के भंडार का एक छोटा सा चमत्कार है। पृथ्वी के अलावा और भी लोक हैं। उन सबमें भी भगवान का भंडार भरा पड़ा हुआ है। बड़ा संपत्तिवान है भगवान। आपको यदि संपत्तियों की, सफलताओं की, विभूतियों की जरूरत है, तो अपना पुरुषार्थ इस काम में खरच करिए कि उस भगवान के साथ में अपना रिश्ता बना लीजिए। उसके साथ जुड़ने में अगर आप समर्थ हो सकें, तो यह सबसे बड़ा पुरुषार्थ होगा। आप भगवान के साथ में अपना रिश्ता बना लें तो मजा आ जाए।


मालदार आदमी से रिश्ता बना लेने पर क्या हो सकता है? लालबहादुर शास्त्री का नाम सुना है आपने, वे बिलकुल एक छोटे से आदमी थे, लेकिन पंडित नेहरू के साथ में उन्होंने अपने घनिष्ठ संबंध बना लिए जिसकी वजह से वे एम. पी. हो गए। उनकी सहायता से वे यूपी के मिनिस्टर भी हो गए और फिर मरने के पश्चात उनके उत्तराधिकारी भी हो गए। बहुत शानदार थे लालबहादुर शास्त्री, यह उनके अपने पुरुषार्थ का उतना फल नहीं था, जितना कि नेहरू जी के सहयोग का। उनकी निगाह में उनकी इज्जत जम गई थी। उन्होंने देख लिया था कि यह आदमी बड़ा उपयोगी है, उसकी सहायता करनी चाहिए। उसकी सहायता से उनने भी लाभ उठाया, इसलिए पंडित नेहरू ने उनकी भरपूर सहायता की। ठीक यही बात हर जगह लागू होती है। भगवान एक सर्वशक्तिमान सत्ता है। उसके साथ अगर आप अपना संबंध जोड़ लें, तब आपकी मालदारी का कोई ठिकाना न रहेगा, तब आप इतने संपन्न हो जाएँगे कि मैं आपसे क्या-क्या कहूँ? आप बापा जलाराम के तरीके से संपन्न हो सकते हैं, आप सुदामा के तरीके से मालदार भी हो सकते हैं, विभीषण और सुग्रीव के तरीके से मुसीबतों से बचकर के फिर से अपना खोया हुआ राजपाट पा सकते हैं। नरसी मेहता के तरीके से हुंडी भी आप पर बरस सकती है। यहाँ कुछ कमी है क्या? यहाँ कोई कमी नहीं है। इसलिए यहाँ जो आपको बुलाया गया है, उसका एक कारण यह भी है कि आप से कहा जाए कि आप भगवान से रिश्ता जोड़ लें। आप जो पूजा करते हैं, उपासना करते हैं, भजन करते हैं, उसका मतलब यह है कि आप इन उपायों के माध्यम से अपना रिश्ता भगवान से जोड़ लें। एक गरीब घर की लड़की की यदि किसी मालदार पति के साथ में शादी हो जाए तो वह दूसरे ही दिन से उसकी मालकिन हो जाती है, क्योंकि उसने उससे रिश्ता मिला लिया।

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