Thursday, November 11, 2021

भगवान के साथ अगर हमारे संबंध हो जाए तो!

 भगवान के साथ अगर हमारे संबंध हो जाए तो!

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गुरुनानक को उनके पिता ने नाराज होकर बीस रुपये व्यापार करने को दिये और कहा-जा व्यापार द्वारा अपना जीवन निर्वाह कर। गुरुनानक देव संत थे, उन्होंने बीस रुपये की हींग खरीदी और वहाँ आये, जहाँ पर संतों का एक भण्डारा चल रहा था। उस समय दाल बन रही थी। उसमें हींग का छोंक लगा दिया तथा सभी के आगे दाल परोस दी। सभी उपस्थित लोगों ने प्रेम से भोजन किया तथा प्रसन्न हुए। प्रातःकाल जब नानक घर पहुँचे, तो उनके पिता काफी नाराज थे। उन्होंने पूछा कि पैसों का क्या किया? नानक जी ने सारी बात बता दी तथा यह कहा कि पिताजी! हमने ऐसा व्यापार किया है, जो भविष्य में हजार गुना होकर वापस होगा। आज वास्तव में गुरुनानक साहेब की याद में स्वर्णमन्दिर अमृतसर में विद्यमान है, जो करोड़ों-अरबों का है। मित्रो, यह भगवान् के साथ व्यापार करने का लाभ है। हमने विचार किया-वह कैसा मंदिर है। करोड़ों का कौन-सा मन्दिर है, जिसमें गुरुनानक सोये हुए हैं। मित्रो, यह महत्त्व है भगवान् के साथ जुड़ने का, उससे सम्बन्ध करने का।


मित्रो, काश्मीर में हजरत मोहम्मद साहब का पवित्र बाल एक शीशी में रखा है। जहाँ हजारों-करोड़ों रुपयों की मस्जिद बनी है, जहाँ मोहम्मद साहब का बाल रखा है। अगर आज गुरुनानक देव, मोहम्मद साहब आ जायें तथा इतना बड़ा मूल्यवान मकान देख लें, तो उनको आश्चर्य होगा। मित्रो, यह आध्यात्मिकता का मूल्य है। भगवान् से सम्बन्ध बनाने के बाद आदमी कितना मूल्यवान हो जाता है, यह विचार करने का विषय है। वह बहुत कीमती हो जाता है। नानक, विवेकानंद, मोहम्मद साहब महान हो गये। भगवान् से सम्बन्ध हो जाने पर आदमी का वजन और मूल्य दोनों बढ़ जाते हैं।


अगर एक औरत की शादी एक सेठजी के साथ होती है तथा दुर्भाग्य से उसके पति का देहान्त हो जाता है, तो दूसरे दिन से ही वह सेठानी, उसकी सारी जमीन-जायदाद की मालकिन बन जाती है। यही होता है-भक्त का भगवान् से सम्बन्ध जोड़ने पर। डॉक्टर की पत्नी डॉक्टरनी, वकील की पत्नी वकीलनी, पंडित की पत्नी पंडितानी बन जाती है, चाहे वह पाँचवीं क्लास ही क्यों न पास हो। जिस प्रकार धर्मपत्नी बनकर आत्मा से सम्बन्ध जोड़ने पर वह पति की सारी सम्पत्ति की मालकिन बन जाती है, उसी प्रकार भगवान् से सम्बन्ध जोड़ने पर होता है। आपको यहाँ हमने इसलिए बुलाया है कि आपका ब्याह भगवान् से करा दें। इसके लिए आपको हमने अनुष्ठान प्रारम्भ कराया है। यह अनुष्ठान आपके विवाह के समय हल्दी लगाने तथा बाल सँवारने, वस्त्र आदि से सजाने के बराबर है। हम आत्मा का परमात्मा से मिलन कराना चाहते हैं। यह बाजीगरी है। हम आपका संबंध भगवान् से कराना चाहते हैं, ताकि आपका सम्बन्ध मालदार आदमी से हो जाये। मालदार आदमी के साथ सम्बन्ध बना लेने से आदमी को हर समय फायदा रहता है।


मित्रो, किसी का सम्बन्ध मालदार आदमी से होता है और वह उसके यहाँ काम करता है, तो उसे सेठजी कुछ लाने को भेजते हैं, तथा सौ रुपये देते हैं। वह अस्सी रुपये का सामान लाता है तथा बीस रुपये अपने पॉकेट में रख लेता है। सेठजी उससे पूछते भी नहीं हैं। इस प्रकार छोटे-छोटे कामों में वह पैसा इकट्ठा करता जाता है और मालदार के साथ मालदार हो जाता है। उसकी बीबी कहती है कि हमारे घर में बाबू की तनख्वाह से क्या होगा, अगर रोज न कमायें। यह है मालदार आदमी से जुड़ने पर भौतिक लाभ। भगवान् से जुड़ने पर हमें क्या-क्या लाभ मिलते हैं, यह आप जुड़कर स्वयं देखें।

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