चेतना का परिष्कार है - अध्यात्म
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गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ—
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
देवियो, भाइयो!
मित्रो! क्रियाएँ क्या हैं? आपको यह मालूम है? क्रियाएँ संकेत करती हैं, दिशाएँ देती हैं कि आखिर हमको करना क्या है? आखिर हमको जीना कैसे है? यह सारे-का अध्यात्म, वह अध्यात्म है, जिसको आपने बाजीगरी का नाम दिया हुआ है। आपको मैं बाजीगरी का इतिहास बताता हूँ। आप बाजीगरी के विद्यार्थी हैं। बाजीगर कौन होते हैं? जो क्रिया पर विश्वास करते हैं। हाथ की हेराफेरी करने से ये मिल सकता है और यह करने से यह मिल सकता है। नेति करने से यह मिलता है, धोति करने से यह मिलता है, बज्रोली करने से यह मिलता है।
आप क्रिया पर विश्वास करते हैं, इसलिए मैं आपको बाजीगर कहता हूँ और बाजीगर की संतान कहता हूँ। क्रिया से क्या हो सकता है? तमाशे से क्या हो सकता है? कुछ नहीं हो सकता। क्रिया किस काम के लिए है? क्रियाओं का मकसद एक है। क्रिया एक शिक्षण है। प्राचीनकाल में पुस्तकें कम थीं, इसलिए ये इशारे बना दिए गए थे कि जीवनयापन करने के ये तरीके अख्तियार करने चाहिए। तरीके अख्तियार करने के लिए तरह-तरह की क्रियाएँ बना दी गई थीं। क्रिया का अपने आप में कोई महत्त्व नहीं है। क्रिया का महत्त्व सिर्फ इस माने में है कि वह मार्गदर्शन करती है कि आपको जीना कैसे चाहिए?
मित्रो! पहले यह जान लीजिए कि अध्यात्म क्या चीज है? अध्यात्म के पीछे की बात बाद में जानिए। अध्यात्म है—"साइंस ऑफ सोल?" 'सोल' की साइंस है—अध्यात्म। 'सोल' किसकी? जीवात्मा की। जीवात्मा की साइंस होती है? एक फिजिक्स साइंस होती है। एक साइंस वह है जो पदार्थ से, मैटर से ताल्लुक रखती है, जिसे केमिस्ट्री कहते हैं, जूलॉजी कहते हैं, बायोलॉजी कहते हैं। यह सारी-की चीजें पदार्थ से ताल्लुक रखती हैं। यह फिजिक्स है, जिसे विज्ञान कहते हैं, साइंस कहते हैं।
चेतना का परिष्कार—अध्यात्म
एक और साइंस है। वह कौन-सी साइंस है? उसका नाम है—"साइंस ऑफ सोल।" पदार्थ की साइंस अलग है, मैटर की साइंस अलग है, परंतु 'सोल' मैटर नहीं है। 'सोल' एक चेतना है। चेतना को हम कैसे परिष्कृत कर सकते हैं? चेतना में निखार कैसे ला सकते हैं और चेतना की क्वालिटी हम कैसे बढ़ा सकते हैं? सारे-के उच्चस्तरीय सिद्धांतों के समुच्चय का नाम अध्यात्म है। अध्यात्म को आप क्या समझते हैं? आप तो ऐसी वाहियात बातें समझते हैं, जिन्हें जानकर गुस्सा आता है। आप क्या समझते हैं? आप तो यह समझते हैं कि शरीर में, दिमाग से क्रिया करेंगे, तो यह कमा लेंगे। यह फायदा कर लेंगे, इस देवता को पकड़ लेंगे। मुक्ति पा लेंगे। यह चमत्कार मिल जाएगा। आप न जाने क्या-क्या ख्वाब सँजो करके रखते हैं?
मित्रो! प्रत्येक क्रिया के पीछे शिक्षण है। प्रत्येक क्रिया के पीछे प्रेरणा है, प्रत्येक क्रिया के पीछे मार्गदर्शन है और प्रत्येक क्रिया के पीछे सूक्ष्म प्रक्रिया है, जो हमको सिखाती है कि हमारे जीवन की क्वालिटी कैसी रहनी चाहिए? क्वालिटी का एक उदाहरण मैं आपको बता सकता हूँ। देवताओं के सामने हम पूजा-पत्री का सामान रखते हैं। क्या-क्या रखते हैं? धूपबत्ती रखते हैं, चंदन रखते हैं, रोली रखते हैं, अक्षत रखते हैं, दीपक रखते हैं। आपकी परिभाषा के मुताबिक़ ये सब चीजें—चमत्कारिक होनी चाहिए। आपकी परिभाषा से देवताओं को इन वस्तुओं के द्वारा प्रसन्न होना चाहिए। इन वस्तुओं के द्वारा बृहस्पति को प्रसन्न करने का क्या तरीका है? पीपल का पत्ता, केले का पत्ता, केले के पत्ते पर हल्दी, हल्दी के ऊपर आँवला, आँवले के ऊपर सुपारी लेकर के चले जाइए और बरगद के नीचे रख करके आइए, बृहस्पति देवता प्रसन्न हो जाएँगे। आपकी परिभाषा के मुताबिक़ यही तरीका है न?
जैसे आप, वैसे आपके विचार। जैसे आपके सिद्धांत, जैसे आपके विश्वास—एक से बढ़कर एक वाहियात हैं—बृहस्पति देवता को प्रसन्न करने के लिए, शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए लोहे की अंगूठी पहन लीजिए। अच्छा आप अँगूठी पहनेंगे और शनि देवता को क्या मिलेगा? चार आने। तेल में उनकी झाँकी देख लीजिए। बेटे! यही तेल शनि देवता को दे आ, ताकि शनि देवता अपनी मालिश तो कर लेंगे। तेल से दाल में बघार लगा लेंगे, छौंक लगा लेंगे और दाल तो खा लेंगे। नहीं साहब! शनि के दिन तेल लगा लीजिए, मालिश कर लीजिए, तो शनि देवता को फायदा हो जाएगा। चल मूर्ख! बेसिर-पैर की बातें करता है, बेबुनियाद की बात करता है।
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