ऋषि चिंतन
*********
जीवन और उसकी परिभाषा
***********************
👉 *"जीवन" क्या है ?* उसके स्वरूप को समझा जाना चाहिए और उसके साथ जुड़े हुए तथ्यों को स्वीकार किया जाना चाहिए, *भले ही वे "कठोर" और "अप्रिय" ही क्यों न प्रतीत होते हों ।*
👉 *"जीवन" एक "चुनौती" है, एक "संग्राम" है* और *एक "जोखिम" है,* उसे इसी रूप में अंगीकार करने के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं ।
👉 *"जीवन" एक "रहस्य" है, "तिलस्म" है, "भूल-भुलैया"* और *"गोरखधंधा" है ।* गंभीरता और सतर्कता के आधार पर ही उसकी तह तक पहुँचा जा सकता है और भ्रांतियों के कारण उत्पन्न होने वाले खतरों से बचा जा सकता है । *"जीवन"* कर्तव्य के रूप में अत्यंत भारी किंतु अभिनेता की तरह हँसने-हँसाने वाला हलका-फुलका रंगमंच भी है ।
👉 *"जीवन" एक "गीत" है,* जिसे पंचम स्वर में गाया जा सकता है ।
👉 *"जीवन"एक "स्वप्न" है,* जिसमें अपने को खोया जा सके तो भरपूर आनंद का रसास्वादन किया जा सकता है
👉 *"जीवन" एक "अवसर" है,* जिसे गँवा देने पर सब कुछ हाथ से गुम जाता है ।
👉 *"जीवन" एक "प्रतिज्ञा" है,* *"यात्रा"* है, *"कला"* है । इसको किस प्रकार सफल बनाया जा सकता है, जिसने इसे जान लिया और मान लिया, *समझना चाहिए कि वह सच्चा "रत्नपारखी" और उपलब्ध विभूतियों का सदुपयोग कर सकने वाला "भाग्यशाली" है ।*
👉 *"जीवन" "सौंदर्य"*'है, *"जीवन"* *"प्रेम"* है, *"जीवन"* वह सब कुछ है *जो नियंता की इस सुविस्तृत सृष्टि में सर्वोत्तम कहा जा सके ।*
No comments:
Post a Comment