*सहानुभूती*
सड़क किनारे अपनी कार खड़ी कर मिस्टर रजनीश ने अपने हाथ के इशारे से टैक्सी रोकवाने की कोशिश की..
*"टैक्सी"!..*
उनका इशारा पाकर एक टैक्सी रुक तो गई लेकिन टैक्सी ड्राइवर ने पिछली सीट पर बैठे नौजवान की ओर इशारा कर मिस्टर रजनीश को बताया कि,.
*"टैक्सी खाली नहीं है सर!"*
तभी उस टैक्सी की पिछली सीट पर बैठे नौजवान की नजरें चिलचिलाती धूप में काफी हैरान-परेशान से दिख रहे उससे उम्र में बड़े मिस्टर रजनीश से टकरा गई और वह पूछ बैठा..
*"कहांँ जाना है आपको?"*
*"मुझे जल्द से जल्द इंफोसिस हाउस पहुंचना है!. लेकिन अचानक मेरी कार खराब हो गई है।"*
मिस्टर रजनीश ने अपनी जेब से रुमाल निकाल माथे पर से पसीना पोंछते हुए अपनी परेशानी उस नौजवान के साथ साझा किया।
मिस्टर रजनीश की बात सुनकर उस नौजवान ने अपने हाथों से उस टैक्सी का दरवाजा अनलॉक कर उन्हें उस टैक्सी के भीतर आ जाने का इशारा किया..
*"मैं भी वहीं जा रहा हूंँ!.आप मेरे साथ आ सकते हैं।"*
अंधा क्या चाहे दो आंखें!.
मिस्टर रजनीश उस नौजवान का शुक्रिया अदा कर झटपट टैक्सी के भीतर आकर उस नौजवान के साथ टैक्सी की पिछली सीट पर बैठ गए।
उस नौजवान द्वारा बुक कर की गई टैक्सी में एक की जगह दो सवारी के बैठने से उस टैक्सी ड्राइवर को भला क्या दिक्कत हो सकती थी।
टैक्सी ड्राइवर भी उस नौजवान की दरियादिली देख मन ही मन संतुष्ट हुआ। उसने टैक्सी आगे बढ़ाया।
इधर पहले से ही एक फाइल खोले उस टैक्सी में बैठा नौजवान फिर से अपना सर झुका उन फाइलों में उलझ गया और टैक्सी सड़क पर अपनी रफ्तार से दौड़ने लगी..
*"आप कुछ विशेष काम से इंफोसिस हाउस जा रहे हैं?"*
मिस्टर रजनीश ने चुप्पी तोड़ फाइलों में उलझे उस नौजवान को टोका।
*"जी!.मैं वहां नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जा रहा हूंँ।"*
वह नौजवान अपनी फाइलों में नजर गड़ाए रहा।
*"आप इस फाइल में क्या पढ़ रहे हैं?"*
*"कुछ जरूरी टॉपिक को एक बार फिर से पढ़ लेता हूंँ!. पता नहीं इंटरव्यू लेने वाले कब कहांँ से क्या सवाल पूछ बैठे।"*
नौजवान फिर से अपनी फाइल के पन्ने पलटने लगा।
*"मान लीजिए!.इतना पढ़ने के बावजूद इंटरव्यू लेने वाले ने नौकरी के लिए आपका सिलेक्शन नहीं किया तो?"*
इस बार उस नौजवान ने अपनी फाइल से नजर हटा कर गौर से मिस्टर रजनीश के चेहरे को देखा लेकिन मिस्टर रजनीश ने अपनी बात को स्पष्ट करना जरूरी समझा..
*"मेरे साथ कई बार ऐसा हो चुका है।"*
*"आप भी वहां नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जा रहे हैं?"*.
अधेड़ उम्र के मिस्टर रजनीश की उम्र को देखते हुए उस नौजवान को आश्चर्य हुआ लेकिन उसका सवाल सुनकर मिस्टर रजनीश हंस पड़े..
*"नहीं!.नहीं!.मैं तो वहां अपने कुछ जरूरी काम से जा रहा हूँ।"*
पूरी बात समझ वह नौजवान सहज हुआ लेकिन मिस्टर रजनीश ने अपनी तरफ से उस नौजवान को बताना जरूरी समझा..
*"मैं वहांँ इंटरव्यू पैनल के कई लोगों को जानता हूंँ अगर आपको मेरी मदद की कोई जरूरत पड़े तो जरूर बताइएगा।"*
यह कहते हुए उन्होंने अपनी जेब से अपना विजिटिंग कार्ड निकाल कर उस नौजवान की ओर बढ़ा दिया लेकिन उस नौजवान ने वह विजिटिंग कार्ड लेने से इंकार कर दिया..
*"आपका यह विजिटिंग कार्ड मैं नहीं ले सकता!"*
*"क्यों?"* मिस्टर रजनीश को आश्चर्य हुआ।
*"मैं यह नौकरी अपनी काबिलियत पर लेना चाहता हूँ!.लेकिन अगर अगली बार आपसे मुलाकात हुई तो मैं आपसे यह विजिटिंग कार्ड जरूर लूंंगा।"*
*"लेकिन इस बीच यह नौकरी किसी और को मिल गई तो?"* मिस्टर रजनीश की बात सुनकर वह नौजवान मुस्कुराया..
*"मान लूँगा कि,.कोई मुझसे भी अधिक जरूरतमंद रहा होगा!"*
उस नौजवान की सरलता और सहजता देख मिस्टर रजनीश हैरान हुए।
तभी टैक्सी ड्राइवर ने इंफोसिस हाउस के सामने टैक्सी रोक दी।
मिस्टर रजनीश के साथ-साथ वह नौजवान भी टैक्सी से बाहर उतरकर उस इमारत के मेन गेट से होकर इंफोसिस हाउस के भीतर प्रवेश कर गया।
ढेरों उम्मीदवारों के बीच बैठे उस नौजवान के इंटरव्यू की बारी भी आई और इंटरव्यू पैनल के हेड के रूप में सामने बैठे सज्जन को देख वह हैरान हुआ।
असल में इंटरव्यू पैनल का हेड कोई और नहीं बल्कि मिस्टर रजनीश ही थे जिन्हें अभी-अभी उसने उनकी कार खराब हो जाने की वजह से अपने पैसों से बुक की गई टैक्सी में लिफ्ट दिया था।
खैर इंटरव्यू में पूछे गए हर एक सवाल का जवाब उस नौजवान ने बहुत ही सहजता से दिया।
परिणाम स्वरूप इंटरव्यू पैनल के सदस्यों ने सर्वसम्मति से वह नौकरी उस नौजवान को दे दिया।
इंटरव्यू पैनल के हेड मिस्टर रजनीश ने अपने हाथों से उस नौजवान को नौकरी का अपॉइंटमेंट लेटर देते हुए उसकी पीठ थपथपाई..
*"शाबाश!.अपने दिल में सहानुभूति की भावना हमेशा ऐसे ही बनाए रखना।"*
*अपनी काबिलियत पर नौकरी पाने वाले उस नौजवान के चेहरे पर आत्मविश्वास देखने लायक था।*
*"अमृत वचन" से साभार*
*SBSR*
*शुभ प्रभात। आज का दिन आपके लिए शुभ एवं मंगलकारी हो।पावन पर्व गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं*
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