Wednesday, September 8, 2021

युग परिवर्तन का संदेश

 = युग परिवर्तन का संदेश =

   ~~ पूज्य गुरुदेव पंडित जी श्रीराम शर्मा जी आचार्य की दिव्य भविष्य दृष्टि~~

 (सन 1986 में गुरुदेव द्वारा दिया गया उद्बोधन जो आज की परिस्थिति में सत्य सिद्ध हो रहा है और भविष्य का खाका बता रहा है )

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         इस समय की परिस्थितियों में जिनमें आज आप हैं, वे अगले दिनों में रहेंगी नहीं |इसमें बहुत काफी हेरफेर पढ़ने वाला है| एक पक्ष विनाश का पक्ष है ,जो चारों ओर चलेगा |आप देख लेना आप तो जिंदा रहेंगे | जिंदा तो हमको भी रहना है ,परंतु स्थूल शरीर से नहीं रहेंगे, तो सूक्ष्म शरीर से बराबर काम करते रहेंगे |और आपके साथ साथ हमेशा रहेंगे| इस समय में क्या होगा ? मुसीबतों से आप भी बच नहीं सकेंगे |चारों दिशाओं में जब आंधियां आती है ,तूफान आते हैं ,बरसात आती है ,तब कोई आदमी सुरक्षित नहीं रह सकता |अगले दिन बहुत भयंकर आने वाले हैं |इसमें क्या होने वाला है ?इसमें नेचर प्रकृति हमसे नाराज हो गई है |बीमारियां फैलती है तो ऐसी फैलती है कि डॉक्टर लोग कहते हैं हमने तो इनका नाम भी नहीं सुना |कभी देखा नहीं | इसको तो हमारी किसी किताब में पढ़ाया ही नहीं गया |हम क्या दवाई दें इसकी ?और डा .कहते हैं कि क्या सुई लगाएं क्या दवा दें |पता ही नहीं |ऐसा मरीज कभी देखा नहीं | ऐसी बीमारियों पर बीमारियां चली आ रही है |हम प्रकृति के प्रकोप से घिरे हुए हैं |हम जहर से घिरे हुए हैं ,महंगाई से घिरे हुए हैं ,और लोगों के खिलवाड़ से घिरे हुए हैं |

             हम आपका काम करेंगे ,और सारी दुनिया का हम काम करेंगे| हम विद्वान नहीं हैं |हम तो तपस्वी हैं | जब से हमने जन्म धारण किया है (1911 ) |तब से लेकर इस समय तक हमारी पूरी की पूरी जिंदगी एक तपस्वी का जीवन जीने मे व्यथित हुई है |इसलिए तपस्वी के पास जो शक्ति होनी चाहिए वह हमारे पास है | यह दुनिया बड़ी तहस-नहस हो रही है |तो आप इसका क्या करोगे ? इसको हम एक धुरी पर इकट्ठे करेंगे |एक धर्म सारी दुनिया का होगा |और एक राष्ट्र सारी दुनिया होगा | एक मैनेजमेंट एक व्यवस्था दुनिया में होगी |क्या व्यवस्था होगी ? ऐसी व्यवस्था होगी कि कोई आदमी छोटा या बड़ा नहीं होगा | समानता के अधिकार हरेक को मिलेंगे | विषमता लोगों के बीच रहेगी नहीं| और सब आदमी एकता से रहेंगे | विषम काल जो आ रहा है इससे बड़ा विषम काल कभी नहीं आया| दुनिया को हम शानदार बनाएंगे |लड़ो गे? पहले हम लड़ेंगे |क्योंकि हर कार्य के लिए पहले नीव खोदनी पड़ती है |और नीव खोदने के बाद उस पर महल बनाया जाता है | नीव खोदने बड़ा संघर्ष होने वाला है |अब इस समय जो लोग हैं उनसे हम कहे , जैसा हम आज आपके सामने कह रहे हैं |तो कोई मान जाएगा क्या? नहीं कोई नहीं मानेगा | तो फिर क्या करना पड़ेगा? जो जिस भाषा को समझता है उसको उसी भाषा में समझाना पड़ेगा | दुनिया का एकीकरण करना है |सारे विश्व में फैले हुए राज्यों का " देशों " का एकीकरण करना है |सबका समानता का हिस्सा होगा |सब आदमी मिल बांट कर खाएंगे| और हंसते हंसाते हुए रहेंगे |

          तोडने मे भी शक्ति लगाएंगे., और बनाने में भी शक्ति लगाएंगे |आपको दुखी हम नहीं रहने देंगे| आपको कठिनाइयों में घिरा हुआ हम नहीं रहने देंगे| हम आप को ऊंचा उठाएंगे |सभी दृष्टि से lपैसे की दृष्टि से? पैसा तो बेटा ऐसा आएगा कि कोई व्यक्ति सोने की सलाखें घर में जमा नहीं कर पाएगा| मालदार नहीं बनाओगे हमें ? हम आपको मालदार नहीं बनाएंगे |हम आपको भावना शील बनाएंगे| हम आपको विचारशील बनाएंगे |सारे संसार को बहुत ही शानदार बनाएंगे |समुन्नत बनाएंगे |सुखी बनाएंगे| ऊंचा उठा हुआ बनाएंगे |और इस तरह का बनाएंगे जैसा कि स्वर्ग है |धरती पर स्वर्ग दिखे ,अगली हमारी यही योजना हैं |और हम अब इसी पर कार्य कर रहे हैं|

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