Sunday, September 19, 2021

स्त्रियों की तपस्या का इतिहास पुरुषों से कम शानदार नहीं है

 

स्त्रियों की तपस्या का इतिहास पुरुषों से कम शानदार नहीं है

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्


प्राचीनकाल में सावित्री ने एक वर्ष तक गायत्री जप करके वह शक्ति प्राप्त की थी जिससे वह अपने मृत-पति सत्यवान के प्राणों को यमराज से लौटा सकी| दमयंती का तप ही था जिसके प्रभाव ने कुचेष्टा करने का प्रयत्न करने वाले व्याघ्र को भस्म कर दिया था| 


गांधारी आँखों से पट्टी बाँधकर ऐसा तप करती थी, जिससे उसके नेत्रों में वह शक्ति उत्पन्न हो गयी थी कि उसके द्रष्टिपात मात्र से दुर्योधन का शरीर अभेद्य हो गया था| जिस जंघा पर उसने लज्जावश कपड़ा डाल दिया, वही कच्ची रह गयी थी और उसी पर प्रहार करके भीम ने दुर्योधन को मारा था| 


अनसूया ने तप से ब्रह्मा, विष्णु, महेश को नन्हें बालक बना दिया था| सती शाण्डिली के तपोबल ने सूर्य का रथ रोक दिया था| सुकन्या की तपस्या से जीर्ण-शीर्ण च्यवन ऋषि तरुण हो गये थे| स्त्रियों की तपस्या का इतिहास पुरुषों से कम शानदार नहीं है| यह स्पष्ट है कि स्त्री और पुरुष सभी के लिये तप का प्रमुख मार्ग गायत्री ही है|  


युगऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य - गायत्री महाविज्ञान

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