Wednesday, September 8, 2021

जीवन" मनुष्य के लिए ईश्वर का सर्वोपरि उपहार है

 ऋषि चिंतन

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"जीवन" मनुष्य के लिए ईश्वर का सर्वोपरि उपहार है

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👉 *"जीवन"* मनुष्य के लिए ईश्वर का सर्वोपरि उपहार है । इसकी गरिमा इतनी बड़ी है जितनी इस संसार में अन्य किसी सत्ता की नहीं । इसलिए उसे ईश्वर के समतुल्य माना जाए तो इसमें कुछ भी अत्युक्ति न होगी । 


👉 ईश्वर की झाँकी जीवनसत्ता की संरचना और संभावना को देखकर की जा सकती है । यदि उसकी ठीक तरह उपासना की जा सके तो वे सभी वरदान उपलब्ध हो सकते हैं, जो ईश्वर के अनुग्रह से किसी को कभी मिल सके हैं । *"यह प्रत्यक्ष देवता है ।"* हमारे इतना समीप है कि मिलन से उत्पन्न असीम आनंद की अनुभूति अहर्निश की जा सके । 


👉 *"जीवन"* का उद्देश्य है, *अंतराल में छिपे दिव्य अद्भुत का, सुंदर का, दर्शन कराना ।* उस ईश्वरीय जीवन के साथ जोड़ देना जो इस ब्रह्माण्ड की आत्मा है, पूर्ण है और वह सब है जिसमें मानवी कल्पना से भी अधिक सौंदर्य का-सुख का सागर लहराता है । 


👉 ईश्वर को समझना हो तो *"जीवन"* को समझो । ईश्वर को पाना हो तो *"जीवन"* को प्राप्त करो । हम जीवन रहित जिंदगी जीते हैं । इससे आगे बढ़ें, गहरे घुसें, निर्मल बनें और उस महान अवतरण को प्रतिबिम्बित करें, जो प्रेम के रूप में आत्मसत्ता के अंतराल में आलोक की एक किरण जैसा विद्यमान है । *आत्मा को दिव्य से ओत-प्रोत करने की साधना से ही वह सब प्राप्त हो सकता है, जिसे "जीवन" का लक्ष्य और वरदान क़हा गया है ।*

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