Wednesday, October 13, 2021

गायत्री का शाप विमोचन और उत्कीलन का रहस्य व ज्ञान विज्ञान क्या है?

 गायत्री का शाप विमोचन और उत्कीलन का रहस्य व ज्ञान विज्ञान क्या है?                                                               यह विदित है कि वैदिककालीन के बडे बडे तपस्वियों ऋषियों ने प्रधान रुप से गायत्री महाविद्धा को ही तपश्चार्य करके अभिष्ट सिद्धियाँ प्राप्त की थी।शाप और वरदान के लिए वे विविध विधियों से गायत्री महामंत्र का ही प्रयोग करते थे।

पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि गायत्री महामंत्र को ब्रह्मा, वसिष्ठ और विश्वामित्र ऋषियों ने शापित कर दिया कि - "भविष्य में गायत्री की साधना निष्फल होगी"।

 इस पौराणिक उपाख्यान में एक गुप्त रहस्य छिपा हुआ है। जिसे नहीं जानने वाले केवल "शापमुक्ताभव" मंत्रों को तोते की तरह दुहरा कर यह मान लेते है कि हमारी साधना शापमुक्त हो गयी ।

   👌मैंने इस बिषय पर विशेष अध्ययन करने के उपरांत इस निष्कर्ष पर पहुंच सका हुँ कि जो वैदिककालीन मे जिस दिव्य सूत्रों को हमारे वैदिककालीन ऋषियों तपस्वियों अपने दैनिक जीवनशैली में आत्मसात् कर तपश्चार्य करते थे । उसी दुर्लभ दिव्य सूत्र को यदि आज के साधक अपने जीवन में आत्मसात् करले तो वही सिद्धियाँ प्राप्त हो सकता है जो वैदिककालीन ऋषियों को प्राप्त होता था।

👌दरसल हमारे पुराणों के रचयिताओं ने एक ऐसी मनगढ़ंत कहानियां लिख दिया कि गायत्री शापित है जिसे ब्रह्मा, वसिष्ठ और विश्वामित्र ने शापित कर दिया है। शापमुक्ताभव मंत्रों का जप किये बिना फलदायी नहीं हो सकता है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। गायत्री महाविद्धा/महामंत्र इस कलियुग में भी शापित या कीलित नहीं है। बल्कि यह महाविद्धा/महामंत्र तीन खुफिया तालों के भीतर सुरक्षित किया गया है या कहें कि हमारे ऋषियों ने इस विद्धा का दुराचारीयों द्वारा दुरप्रयोग न हो ,इसे कोई कुपात्र इस गायत्री शक्ति का मनमाना प्रयोग न कर सके, इसलिए कलियुग से पूर्व ही गायत्री को ब्रह्मा, वसिष्ठ और विश्वामित्र द्वारा कीलित कर दिया गया है ऐसा पुराणवेत्ताओं ने लिख कर दिग्भ्रमित मात्र किया गया है।जिससे कि इस विद्धा का दुरप्रयोग से बचाव हो सके।

जैसा कि आप हम सभी अपने अपने अमूल्य धरोहर को तालों में बंद कर रखते है जिससे कि कोई दुराचारी चुरा न ले जाए। ठीक उसी प्रकार इस दुर्लभ विद्या को तीन तालों (शापित) के भीतर बंद किया हुआ है। उन तीनों खुफिया तालों का चाभियाँ निम्न है :- 

1) ब्रह्मा नाम का चाभी

2) वसिष्ठ नाम का चाभी और 

3) विश्वामित्र नाम का चाभी ।


       आप में से अनेकों ने कहीं देखा होगा कि आज भी कुछ विशेष ताले एक से अनेक चाभियाँ से खुलती है। ठीक उसी प्रकार गायत्री महाविद्धा/महामंत्र शापितनुमा जो ताला लगा दिया गया है उपरोक्त सभी तीनों चाभियाँ से ही खुल पायेगा। वैसे आप लाख कोशिश कर ले खुल नहीं सकता है। अर्थात आप कितना भी गायत्री का मंत्र जप - तप, साधना - तपश्चार्य कर ले खुलनेवाला नहीं है। यह सभी एक खुफिया चाभियाँ है। जिसे कोई योग्य साधक या कहें गुरु के पास हो सकता है। जिसे आप ढूढें या उस खुफिया चाभियाँ को स्वयं साधना के संकल्पबल के आधार पर प्राप्त कर सकते है।


👌ये तीन रहस्यमयी खुफिया चाभियाँ का रहस्य ज्ञान विज्ञान क्या है:


👍ब्रह्मा: यह गायत्री महाविद्धा का पहला चाभी है। इसका संबंध है हमारे जीवन में शुद्धता से ,सुचिता से, ब्रह्म आचरण से। अर्थात ब्रह्माचर्य का पालन करना। मन वचन और कर्म की शुद्धता - संयम का होना । यानि सुचिता का पालन करना।

👍वसिष्ठ: वसिष्ठ का अर्थ होता है "#विशेष_रुप_से_श्रेष्ठ' का होना। यह दुसरा दिव्य खुफिया चाभियाँ है। गायत्री साधना मे जिन्होंने विशेष रुप से श्रम किया हो।.जिसने कमसे कम सवा करोड़ गायत्री महामंत्र का जप ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए किया हो उसे #वसिष्ठ कहते हैं।

          सवा करोड़ गायत्री जप की साधना उपासना करनेवाला कोई गायत्री साधक उपासक ही वसिष्ठ की संरक्षण प्राप्त कर लेता है । यही वास्तविक में वसिष्ठ #शापमुक्ताभव विमोचन है।

👍विश्वामित्र: यह गायत्री महाविद्धा लगा तीसरा ताला का विशेष व गुप्त चाभियाँ में से एक है। इसके बिना गायत्री महाविद्धा पर शापरुपेण लगा हुआ ताला खुल नहीं सकता है।ताकि कोई दुराचारी खोल न सके।#विश्वामित्र का अर्थ होता है संसार का भलाई करने वाला ,परमार्थी, उदार ह्रदय वाला व्यक्ति सत्यपुरुष, कर्तव्यनिष्ठ हो। ऐसा जीवन जीने वाले को विश्वामित्र कहते है।


✌गायत्री का पथप्रदर्शक जिसे हम गुरु कह सकते हैं - केवल वसिष्ठ गुणवाल होना ही पर्याप्त नहीं है क्योंकि इसे तो कोई भी दुराचारी लोभवश पुरा कर सकता है। 

     परंतु उसे ब्रह्माचरण करने वाला तथा विश्वामित्र के गुणों से पूर्ण होना चाहिए। ऐसे गुरु या पथप्रदर्शक ही अपने शिष्य को सही रास्ता दिखा सकता है। 

लेकिन विडम्वना यह है कि आजकल इस कलियुग में ऐसे पथप्रदर्शक या गुरु मिलते कहाँ है। इसलिए उपरोक्त शापमुक्ताभव की चाभियाँ स्वय ढूंढने की इस आध्यात्म जगत में आवश्यकता है अन्यथा उस साधक का श्रम वेकार जाएगा। जिस साधक को ब्रह्माचरण करने वाला, वसिष्ठ और विश्वामित्र इन तीनों गुणधारक पथप्रदर्शक या गुरु प्राप्त कर लिया उसनै तीनों शापों से गायत्री को मुक्त कर लिया ।


      लेकिन हमरा सौभाग्य है कि परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति तपोनिष्ठ गायत्री उपासक पंडित श्री राम शर्मा आचार्य जी हमारे संरक्षक है। जिन्होंने अपने जीवन में 24-24 लक्ष का 24 पुरश्चरण कर गायत्रीमय जीवन जीये है। मैं धन्य हुँ। ये आज के वसिष्ठ और विश्वामित्र है । मैं शत शत नमन करता हूँ। यदि आप को यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे तो अवश्य अपने अन्य गायत्री परीजनों ग्रुपों के बीच शेयर फॉरवर्ड अवश्य करें।

संजय कुमार (शोधकर्त्ता वैज्ञानिक आध्यात्म)

9968513410//8800191940

Email sanjayk1288@gmail.com

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