शक्ति का परिणाम प्रयोग करने वालों की इच्छा पर निर्भर है।
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इच्छा शक्ति एक प्रचण्ड बल है। मनुष्य जीवन का यही बिजली-घर है। इस शक्ति का जो जैसा उपयोग करता है, वह वैसा ही बन जाता है।
आग में जलाने की ताकत मौजूद है। कोई इस ताकत को भली ओर लगाता है, कोई बुरी ओर। वैज्ञानिक और शिल्पी लोग इसकी सहायता से भाप बनाकर कल-कारखाने चलाते हैं और तरह-तरह की चीजें तैयार करते हैं। पण्डित हवन करके इसके द्वारा वायु शुद्ध करते हैं और चोर, डाकू, लुटेरे आग लगाकर गाँव के गाँव को तबाह कर देते हैं, सैकड़ों को अनाथ बना देते हैं। शक्ति का क्या परिणाम होगा? यह प्रयोग करने वालों की इच्छा पर निर्भर है।
ईश्वर को प्राप्त करने की इच्छा से कितने ही अज्ञात पुरुष पर्वतों की गुफाओं में बैठे हुए तप कर रहे हैं। मनुष्य यदि अपने उद्देश्य की सिद्धि के लिए दृढ़ संकल्प कर ले, तो शरीर का दुःख-कष्ट कोई बाधा खड़ी नहीं कर सकता।
पहाड़ से निकला हुआ पानी झरना जैसे सामने की शिलाओं और पत्थरों को तोड़ता-फोड़ता अपना रास्ता बना लेता है, वैसे ही दृढ़ इच्छाशक्ति भी विघ्नों को हटाकर सफलता तक पहुँचा देती है।
मनुष्य यदि किसी विषय पर विचार करके "करूँगा" स्थिर कर ले, तो उसे करने में वह अपने शरीर तक को होम सकता है। ऐसी दशा में कोई कारण नहीं, कि सफलता न मिले।
सर्वशक्तिमान मङ्गलमय परमात्मा ने मनुष्य के शरीर के भीतर यह महाशक्ति रखी है। हम इस महाशक्ति के महत्व को नहीं समझते। बहुतों को इसके अस्तित्व का भी ज्ञान नहीं है, पर यह निश्चित है कि इच्छाशक्ति की सहायता के बिना कोई सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।
( संकलित व सम्पादित)
अखण्ड ज्योति मार्च 1941 पृष्ठ 21
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