Monday, October 4, 2021

व्यवहार से ही बुद्धिमता और महानता का प्रमाण मिलता है

 व्यवहार से ही बुद्धिमता और महानता का प्रमाण मिलता है।

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      (1) प्रायः अनेकों प्रसङ्गों में बिना सोचे समझे ही अपने सम्बन्धियों और मित्रों को भ्रमवश, अभिमानवश, आवेश में आकर न कहने योग्य बर्ताव कर बैठते हैं। इस प्रकार के आवेश पर नियन्त्रण प्राप्त करना चाहिए।

       (2) ध्यान रहे! जो मनुष्य चरित्रहीन, स्वार्थी, अभिमानी एवं विवेकरहित होता है, वही हर एक अवसर पर प्रायः कर्तव्य और धर्म से विचलित होता है और इसी प्रकार के व्यक्ति मानव-समाज में ईर्ष्या, द्वेष, कलह आदि दुर्गुणों को फैलाते रहते हैं।

      (3) आप अपने भीतर देखते रहिये! जहाँ कहीं उद्दण्डता, अभिमान-वश आसुरी प्रकृति के लक्षण व्यवहार में आ जाएँ, वहीं अपनी विद्या एवं बुद्धिमत्ता को धिक्कारिये!

       (4)आप विचार करके देखिये, कितनी ही बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ आपको मिल जावें और कितने ही वैभव, ऐश्वर्य के बीच आप क्यों न रहें, सैकड़ों मनुष्य आप के इशारे पर क्यों न नाचते रहें, फिर भी आपकी बुद्धिमत्ता और महानता का सच्चा पता आपके दैनिक व्यवहारों से ही मिलेगा।

( संकलित व सम्पादित)

 अखण्ड ज्योति मई 1947 पृष्ठ 27

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